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रविवार, 14 दिसंबर 2014

इस्लामी बंदगी दरिंदगी और गंदगी !

इस्लामी बंदगी दरिंदगी और गंदगी !


जगत में जितने भी जीवधारी हैं ,सबको अपनी जान प्यारी होती है .और सब अपने बच्चों का पालन करते हैं .इसमे किसी को कोई शंका नहीं होना चाहिए .परन्तु अनेकों देश के लोग इन निरीह और मूक प्राणियों को मार कर उनके शरीर के अंगों या मांस को खाते हैं.ऐसे लोग इन प्राणियों को मार कर खाने के पक्ष में कई तर्क और फायदे बताते हैं .सब जानते हैं कि बिना किसी प्राणी को मारे बिना उसका मास खाना असंभव है ,फिर भी ऐसे लोग खुद को “शरीर भक्षी (Carnivorous ) कि जगह (Non vegetarian ) कहकर खुद को सही ठहराते हैं .कुछ लोग शौक के लिए और कुछ देखादेखी भी आमिष भोजन करते हैं .लेकिन इस्लाम ने मांसभक्षण को और जानवरों की क़ुरबानी को एक धार्मिक और अनिवार्य कृत्य बना दिया है . और क़ुरबानी को अल्लाह की इबादत का हिस्सा बताकर सार्वजनिक रूप से मानाने वाला त्यौहार बना दिया है .क़ुरबानी ,क्या है , इसका उद्देश्य क्या है ,और मांसाहार से इन्सान स्वभाव में क्या प्रभाव पड़ता है ,यह इस लेख में कुरान और हदीस के हवालों दिया जा रहा है .साथ में कुछ विडियो लिंक भी दिए हैं .देखिये

1-कुरबानी का अर्थ और मकसद

अरबी शब्दकोश के अनुसार “क़ुरबानी قرباني” शब्द मूल यह तीन अक्षर है 1 .قकाफ 2 .رरे 3 और  ب बे = क र बق ر ب .इसका अर्थ निकट होना है .तात्पर्य ऐसे काम जिस से अल्लाह की समीपता प्राप्त हो . हिंदी में इसका समानार्थी शब्द ” उपासना” है .उप = पास ,आस =निकट .लेकिन अरबी में जानवरों को मारने के लिए “उजुहाالاضحي ” शब्द है जिसका अर्थ “slaughter ” होता है .इसमे किसी प्रकार की कोई आध्यात्मिकता नजर नहीं दिखती है .बल्कि क्रूरता , हिंसा ,और निर्दयता साफ प्रकट होती है .जानवरों को बेरहमी से कटते और तड़प कर मरते देखकर दिल काँप उठता है और यही अल्लाह चाहता है , कुरान में कहा है ,

“और उनके दिल उस समय काँप उठते हैं , और वह अल्लाह को याद करने लगते हैं ” सूरा -अल हज्ज 22 :35

2-क़ुरबानी की विधियाँ

यद्यपि कुरान में जानवरों की क़ुरबानी करने के बारे में विस्तार से नहीं बताया है और सिर्फ यही लिखा है ,

“प्रत्येक गिरोह के लिए हमने क़ुरबानी का तरीका ठहरा दिया है , ताकि वह अपने जानवर अल्लाह के नाम पर कुर्बान कर दें ”

सूरा -हज्ज 22 :34

लेकिन सुन्नी इमाम ” मालिक इब्न अबी अमीर अल अस्वही” यानि मालिक बिन अनस مالك بن انس “(711 – 795 ई० ) नेअपनी प्रसिद्ध अल मुवत्ताThe Muwatta: (Arabic: الموطأ‎)  की किताब 23 और 24 में जानवरों और उनके बच्चों की क़ुरबानी के जो तरीके बताएं है . उसे पढ़कर कोई भी अल्लाह को दयालु नहीं मानेगा ,

 3-पशुवध की राक्षसी विधियाँ

मांसाहार अरबों का प्रिय भोजन है ,इसके लिए वह किसी भी तरीके से किसी भी जानवर को मारकर खा जाते थे . जानवर गाभिन हो या बच्चा हो ,या मादा के पेट में हो सबको हजम कर लेते थे . और रसूल उनके इस काम को जायज बता देते थे बाद में यही सुन्नत बन गयी है और सभी मुसलमान इसका पालन करते हैं ,इन हदीसों को देखिये ,

अ -खूंटा भोंक कर

“अनस ने कहा कि बनू हरिस का जैद इब्न असलम ऊंटों का चरवाहा था , उसकी गाभिन ऊंटनी बीमार थी और मरणासन्न थी . तो उसने एक नोकदार खूंटी ऊंटनी को भोंक कर मार दिया . रसूल को पता चला तो वह बोले इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऊंटनी को खा सकते हो ”

मालिक मुवत्ता-किताब 24 हदीस 3

ब-पत्थर मार कर

“याहया ने कहा कि इब्न अल साद कि गुलाम लड़की मदीने के पास साल नामकी जगह भेड़ें चरा रही थी. एक भेड़ बीमार होकर मरने वाली थी.तब उस लड़की ने पत्थर मार मार कर भेड़ को मार डाला .रसूल ने कहा इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऐसा कर सकते हो ”

मालिक मुवत्ता -किताब 24 हदीस 4

जानवरों को मारने कि यह विधियाँ उसने बताई हैं , जिसको दुनिया के लिए रहमत कहा जाता है ?और अब किस किस को खाएं यह भी देख लीजये .

4-किस किस को खा सकते हो

इन हदीसों को पढ़कर आपको राक्षसों की याद आ जाएगी .यह सभी हदीसें प्रमाणिक है ,यह नमूने देखिये

अ -घायल जानवर

“याह्या ने कहा कि एक भेड़ ऊपर से गिर गयी थी ,और उसका सिर्फ आधा शरीर ही हरकत कर रहा था ,लेकिन वह आँखें झपक रही थी .यह देखकर जैद बिन साबित ने कहा उसे तुरंत ही खा जाओ “मालिक मुवत्ता किताब 24 हदीस 7

ब -मादा के गर्भ का बच्चा

“अब्दुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि जब एक ऊंटनी को काटा गया तो उसके पेट में पूर्ण विक्सित बच्चा था ,जिसके बल भी उग चुके थे . जब ऊंटनी के पेट से बच्चा निकाला गया तो काफी खून बहा ,और बच्चे दिल तब भी धड़क रहा था.तब सईद इब्न अल मुसय्यब ने कहा कि माँ के हलाल से बच्चे का हलाल भी माना जाता है . इसलिए तुम इस बच्चे को माँ के साथ ही खा जाओ ” मुवत्ता किताब 24 हदीस 8 और 9

स -दूध पीता बच्चा

“अबू बुरदा ने रसूल से कहा अगर मुझे जानवर का केवल एकही ऐसा बच्चा मिले जो बहुत ही छोटा और दूध पीता हो , रसूल ने कहा ऐसी दशा में जब बड़ा जानवर न मिले तुम बच्चे को भी काट कर खा सकते हो ” मालिक मुवत्ता -किताब 23 हदीस 4

5-क़ुरबानी का आदेश और तरीका

वैसे तो कुरान में कई जानवरों की क़ुरबानी के बारे में कहा गया है ,लेकिन यहाँ हम कुरान की आयत विडियो लिंक देकर कुछ जानवरों की क़ुरबानी के बारे जानकारी दे रहे हैं .ताकि सही बात पता चल .सके , पढ़िए और देखिये ,

अ -गाय “याद करो जब अल्लाह ने कहा की गाय को जिबह करो ,जो न बूढी हो और न बच्ची बीच का आयु की हो “सूरा -बकरा 2 :67 -68









ब- ऊंट -“और ऊंट की कुरबानी को हमने अल्लाह की भक्ति की निशानियाँ ठहरा दिया है “सूरा अल हज्ज 22 :36







स -चौपाये बैल -“तुम्हारे लिए चौपाये जानवर भी हलाल हैं ,सिवाय उसके जो बताये गए हैं “सूरा-अल 22 :30







6-गैर मुस्लिमों को गोश्त खिलाओ

“इब्ने उमर और और इब्न मसूद ने कहा की रसूल ने कहा है ,कुरबानी का गोश्त तुम गैर मुस्लिम दोस्त को खिलाओ ,ताकि उसले दिल में इस्लाम के प्रति झुकाव पैदा हो ”

it is permissible to give some of it to a non-Muslim if he is poor or a relative or a neighbor, or in order to open his heart to Islam.

“فإنه يجوز أن أعطي بعض منه الى غير مسلم إذا كان فقيرا أو أحد الأقارب أو الجيران، أو من أجل فتح صدره للإسلام ”



Sahih Al-Jami`, 6118

गैर मुस्लिमों जैसे हिन्दुओं को गोश्त खिलाने का मकसद उनको मुसलमान बनाना है ,क्योंकि यह धर्म परिवर्तन की शुरुआत है .बार बार खाने से व्यक्ति निर्दयी और कट्टर मुसलमान बन जाता है .

 7-गोश्तखोरी से आदमखोरी

मांसाहारी व्यक्ति आगे चलकर नरपिशाच कैसे बन जाता है ,इसका सबूत पाकिस्तान की ARY News से पता चलता है ,दिनांक 4 अप्रैल 2011 पुलिस ने पाकिस्तान पंजाब दरया खान इलाके से आरिफ और फरमान नामके ऐसे दो लोगों को गिरफ्तार किया ,जो कब्र से लाशें निकाल कर ,तुकडे करके पका कर खाते थे . यह परिवार सहित दस साल से ऐसा कर रहे थे.दो दिन पहले ही नूर हुसैन की 24 की बेटी सायरा परवीन की मौत हो गयी थी ,फरमान ने लाश को निकाल लिया ,जब वह आरिफ के साथ सायरा को कट कर पका रहा था ,तो पकड़ा गया . पुलिस ने देगची में लड़की के पैर बरामद किये . इन पिशाचों ने कबूल किया कि हमने बच्चे और कुत्ते भी खाए हैं .ऐसा करने कीप्रेरणा हमें दूसरों से मिली है , जो यही काम कराते हैं . विडियो लिंक





 8-हलाल से हराम तक

खाने के लिए जितने भी जानवर मारे जाते हैं ,उनका कुछ हिस्सा ही खाया जाता है , बाकी का कई तरह से इस्तेमाल करके लोगों को खिला दिया जाता है ..इसके बारे में पाकिस्तान के DUNYA NEWS की समन खान ने पाकिस्तान के लाहौर स्थित बाबू साबू नाले के पास बकर मंडी के मजबह (Slaughter House ) का दौरा करके बताया कि वहां ,गधे कुत्ते , चूहे जैसे सभी मरे जानवरों की चर्बी निकाल कर घी बनाया जाता है . यही नहीं होटलों में खाए गए गोश्त की हडियों को गर्म करके उसका भी तेल निकाल कर पीपों में भर कर बेच दिया जाता है ,जिसे जलेबी ,कबाब ,समोसे आदि तलने के लिए प्रयोग किया होता है . खून को सुखा कर मुर्गोयों की खुराक बनती है . फिर इन्हीं मुर्गियों को खा लिया जाता है .आँतों में कीमा भरके बर्गर बना कर खिलाया जाता है







हमारी सरकार जल्द ही पाकिस्तान के साथ व्यापारिक अनुबंध करने जारही है ,और तेल या घी के नाम पर जानवरों की चर्बी और ऐसी चीजें यहाँ आने वाली हैं .

लोगों को फैसला करना होगा कि उन्हें पूर्णतयः शाकाहारी बनकर ,शातिशाली , बलवान ,निर्भय और जीवों के प्रति दयालु बन कर देश और विश्व कि सेवा करना है ,या धर्म के नाम पर या दुसरे किसी कारणों से प्राणियों को मारकर खाके हिसक क्रूर निर्दयी सर्वभक्षी पिशाच बन कर देश और समाज के लिए संकट पैदा करना है .

दूसरेधर्मों के लोग ईश्वर को प्रसन्न करने और उसकी कृपा प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करके खुद को कष्ट देते हैं .लेकिन इस्लाम में बेजुबान जानवरों को मार कर अल्लाह को खुश किया जाता है . और इसी को इबादत या बंदगी माना जाता है .फिर यह बंदगी दरिंदगी बन जाती है .और जिसका नतीजा गन्दगी के रूप में लोग खाते हैं

इस लेख को पूरा पढ़ने के बाद विचार जरुर करिए .

माँसाहारी अत्याचारी ,और अमानुषिक हो सकते हैं लेकिन बलवान और सहृदय कभी नहीं सो सकते .

भारत मुसलमानों के लिए स्वर्ग क्यों है ?

भारत मुसलमानों के लिए स्वर्ग क्यों है ?

विश्व की कुल जनसंख्या में प्रत्येक चार में से एक मुसलमान है। मुसलमानों की 60 प्रतिशत जनसंख्या एशिया में रहती है तथा विश्व की कुल मुस्लिम जनसंख्या का एक तिहाई भाग अविभाजित भारत यानी भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश

में रहता है। विश्व में 75 देशों ने स्वयं को इस्लामी देश घोषित कर रखा है। पर, विश्व में जितने भी बड़े-बड़े मुस्लिम देश माने जाते हैं, मुस्लिमों को कहीं भी इतनी सुख-सुविधाएं या मजहबी स्वतंत्रता नहीं है जितनी कि भारत में। इसीलिए किसी ने सच ही कहा है कि ‘मुसलमानों के लिए भारत बहिश्त (स्वर्ग) है।’ परन्तु यह भी सत्य है कि विश्व के एकमात्र हिन्दू देश भारत में इतना भारत तथा हिन्दू विरोध कहीं भी नहीं है, जितना ‘इंडिया दैट इज भारत’ में है। इस विरोध में सर्वाधिक सहयोगी हैं-सेकुलर राजनीतिक स्वयंभू बुद्धिजीवी तथा कुछ चाटुकार नौकरशाह। उनकी भावना के अनुरूप तो इस देश का सही नाम ‘इंडिया दैट इज मुस्लिम’ होना चाहिए .क्योंकि विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहाँ केवल जनसंख्या के आधार पर मुसलमानों की जायज नाजायज मांगें पूरी कर दी जाती हैं , भले वह देश को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ें ,

1-कम्युनिस्ट देश तथा मुस्लिम

आज जो कम्यूनिस्ट सेकुलरिज्म के बहाने मुसलमानों के अधिकारों की वकालत करते हैं , उन्हें पता होना चाहिए कि कम्युनिस्ट देशों में मुसलमानों की क्या हालत है।

विश्व के दो प्रसिद्ध कम्युनिस्ट देशों-सोवियत संघ (वर्तमान रूस) तथा चीन में मुसलमानों की जो दुर्गति हुई वह सर्व विदित है तथा अत्यन्त भयावह है। कम्युनिस्ट देश रूस में भयंकर मुस्लिम नरसंहार तथा क्रूर अत्याचार हुए। नारा दिया गया ‘मीनार नहीं, मार्क्स चाहिए।’ हजारों मस्जिदों को नष्ट कर हमाम (स्नान घर) बना दिए गए। हज की यात्रा को अरब पूंजीपतियों तथा सामन्तों का धन बटोरने का तरीका बताया गया। चीन में हमेशा से उसका उत्तर-पश्चिमी भाग शिनचियांग-मुसलमानों की वधशाला बना रहा। इस वर्ष भी मुस्लिम अधिकारियों तथा विद्यार्थियों को रमजान के महीने में रोजे रखने तथा सामूहिक नमाज बढ़ने पर प्रतिबन्ध लगाया गया।

2-यूरोपीय देश तथा मुस्लिम

सामान्यत: यूरोप के सभी प्रमुख देशों-ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, आदि में मुसलमानों के अनेक सामाजिक रीति-रिवाजों पर प्रतिबंध है। प्राय: सभी यूरोपीय देशों में मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने तथा मीनारों के निर्माण तथा उस पर लाउडस्पीकर लगाने पर प्रतिबंध है। बिट्रेन में इंडियन मुजहीद्दीन सहित 47 मुस्लिम आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। ब्रिटेन का कथन है कि ये संगठन इस्लामी राज्य स्थापित करने और शरीयत कानून को लागू करने का अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए हिंसा का प्रयोग करते हैं। जर्मनी में भी बुर्के पर पाबन्दी है। जर्मनी के एक न्यायालय ने मुस्लिम बच्चों के खतना (सुन्नत) को ‘मजहबी अत्याचार’ कहकर प्रतिबंध लगा दिया है तथा जो डाक्टर उसमें सहायक होगा, उसे अपराधी माना जाएगा। जर्मनी के कोलोन शहर की अदालत ने बुधवार को सुनाए गए एक फैसले में कहा कि धार्मिक आधार पर शिशुओं का खतना करना उनके शरीर को कष्टकारी नुकसान पहुंचाने के बराबर है.और प्राकृतिक नियमों में हस्तक्षेप है

जर्मनी में मुस्लिम समुदाय इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं और वे इस बारे में कानूनविदों से मशविरा कर रहे हैं.

आशा है विश्व के सारे देश जल्द ही जर्मनी का अनुसरण करने लगेंगे.इसी तरह फ्रांस विश्व का पहला यूरोपीय देश था जिसने पर्दे (बुर्के) पर प्रतिबंध लगाया।

3-मुस्लिम देशों में मुसलमानों की हालत

विश्व के बड़े मुस्लिम देशों में भी मुसलमानों के मजहबी तथा सामाजिक कृत्यों पर अनेक प्रकार के प्रतिबंध है। तुर्की में खिलाफत आन्दोलन के बाद से ही रूढ़िवादी तथा अरबपरस्त मुल्ला- मौलवियों की दुर्गति होती रही है। तुर्की में कुरान को अरबी भाषा में पढ़ने पर प्रतिबंध है। कुरान का सार्वजनिक वाचन तुर्की भाषा में होता है। शिक्षा में मुल्ला-मौलवियों का कोई दखल नहीं है। न्यायालयों में तुर्की शासन के नियम सर्वोपरि हैं। रूढ़िवादियों की सोच तथा अनेक पुरानी मस्जिदों पर ताले डाल दिए गए हैं। (पेरेवीज, ‘द मिडिल ईस्ट टुडे’ पृ. 161-190; तथा ऐ एम चिरगीव -इस्लाम इन फरमेन्ट, कन्टम्परेरी रिव्यू, (1927)। ईरान व इराक में शिया-सुन्नी के खूनी झगड़े-जग जाहिर हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी यह स्वीकार किया है कि यहां मुसलमान भी सुरक्षित नहीं हैं। यहां मुसलमान परस्पर एक-दूसरे से लड़ते रहते हैं। उदाहरण के लिए जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान ने अहमदिया सम्प्रदाय के हजारों लोगों को मार दिया। इसके साथ हिन्दुओं के प्रति उनका क्रूर व्यवहार, जबरन मतान्तरण, पवित्र स्थलों को अपवित्र करना, हिन्दू को कोई उच्च स्थान न देना आदि भी जारी है। उनकी क्रूरता के कारण पाकिस्तानी हिन्दू वहां से जान बचाकर भारत आ रहे हैं। वहां हिन्दुओं की जनसंख्या घटकर केवल एक प्रतिशत के लगभग रह गई है। हिन्दुओं की यही हालत 1971 में बने बंगलादेश में भी है। वहां भी उनकी जनसंख्या 14 प्रतिशत से घटकर केवल 1 प्रतिशत रह गई है। साथ ही बंगलादेशी मुसलमान भी लाखों की संख्या में घुसपैठियों के रूप में जबरदस्ती असम में घुस रहे हैं।

अफगानिस्तान की अनेक घटनाओं से ज्ञात होता है जहां उन्होंने हिन्दुओं तथा बौद्धों के अनेक स्थानों को नष्ट किया, वहीं जुनूनी मुस्लिम कानूनों के अन्तर्गत मुस्लिम महिलाओं को भी नहीं बख्शा, नादिरशाही फतवे जारी किए। मंगोलिया में यह प्रश्न विवादास्पद बना रहा कि यदि अल्लाह सभी स्थानों पर है तो हज जाने की क्या आवश्यकता है? सऊदी अरब में मुस्लिम महिलाओं के लिए कार चलाना अथवा बिना पुरुष साथी के बाहर निकलना मना है। पर यह भी सत्य है कि किसी व्यवधान अथवा सड़क के सीध में न होने की स्थिति में मस्जिद को हटाना उनके लिए कोई मुश्किल नहीं है।

4-भारत में मुस्लिम तुष्टीकरण

अंग्रेजों ने भारत विभाजन कर, राजसत्ता का हस्तांतरण कर उसे कांग्रेस को सौंपा। साथ ही इन अलगाव विशेषज्ञों ने, अपनी मनोवृत्ति भी कांग्रेस का विरासत के रूप में सौंप दी। अंग्रेजों ने जो हिन्दू-मुस्लिम अलगाव कर तुष्टीकरण की नीति अपनाई थी, वैसे ही कांग्रेस ने वोट बैंक की चुनावी राजनीति में इस अलगाव को अपना हथियार बनाया। उसने मुस्लिम तुष्टीकरण में निर्लज्जता की सभी हदें पार कर दीं। यद्यपि संविधान में ‘अल्पसंख्यक’ की कोई निश्चित परिभाषा नहीं दी गई हैं, परन्तु व्यावहारिक रूप से चुनावी राजनीति को ध्यान में रखते हुए मुसलमानों को अल्पसंख्यक मान लिया गया तथा उन्हें खुश करने के लिए उनकी झोली में अनेक सुविधाएं डाल दीं। उनके लिए एक अलग मंत्रालय, 15 सूत्री कार्यक्रम व बजट में विशेष सुविधाएं, आरक्षण, हज यात्रा पर आयकर में छूट तथा सब्सिडी आदि। सच्चर कमेटी तथा रंगनाथ आयोग की सिफारिशों ने इन्हें प्रोत्साहन दिया। भारतीय संविधान की चिन्ता न कर, न्यायालय के प्रतिरोध के बाद भी, मजहबी आधार पर आरक्षण के सन्दर्भ में कांग्रेस के नेता वक्तव्य देते रहते हैं।

5-हज सब्सिडी में घोटाले

विश्व में मुस्लिम देशों में हज यात्रा के लिए कोई विशेष सुविधा नहीं है। बल्कि मुस्लिम विद्वानों ने हज यात्रा के लिए दूसरे से धन या सरकारी चंदा लेना गुनाह बतलाया है। पर कांग्रेस शासन में 1959 में बनी पहली हज कमेटी के साथ ही सिलसिला शुरू हुआ हज में सुविधाओं का। सरकारी पूंजी का खूब दुरुपयोग हुआ। हज घोटालों के लिए कई जांच आयोग भी बैठे। हज सद्भावना शिष्ट मण्डल, हज में भी ‘वी.आई.पी. कोटा’ आदि की सूची बनने लगी। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के बाद जम्मू-कश्मीर के अब्दुल रसीद ने सरकार द्वारा सदभावना शिष्टमण्डल के सदस्यों के चयन पर प्रश्न खड़ा किया। क्योंकि उसमें 170 हज यात्रियों के नाम बदले हुए पाए गए। आखिर सर्वोच्च न्यायालय ने दखल दिया तथा ‘अति विशिष्टों की’ संख्या घटाकर 2500 से केवल 300 कर दी।

सामान्यत: प्रत्येक हज यात्री पर सरकार का लगभग एक लाख रु. खर्च होता है, परन्तु सरकारी प्रतिनिधियों पर आठ से अट्ठारह लाख रु. खर्च कर दिए जाते हैं। गत वर्ष राष्ट्रीय हज कमेटी ने यात्रियों को कुछ कुछ अन्य सुविधाएं प्रदान की, जिसमें 70 वर्ष के आयु से अधिक के आवेदक व्यक्तियों के लिए निश्चित यात्रा, चुने गए आवेदकों को आठ महीने रहने का परमिट तथा हज यात्रा पर जाने वाले यात्री के लिए पुलिस द्वारा सत्यापन में रियायत दी गई। इसके विपरीत श्रीनगर से 135 किलोमीटर की कठिन अमरनाथ यात्रा के लिए, जिसमें इस वर्ष 6 लाख 20 हजार यात्री गए, और आने-जाने के 31 दिन में 130 श्रद्धालु मारे गए, जिनके शोक में एक भी आंसू नहीं बहाया गया।

6-भारत का इस्लामीकरण

असम में बंगलादेश के लाखों मुस्लिम घुसपैठियों के प्रति सरकार की उदार नीति, कश्मीर में तीन वार्ताकारों की रपट पर लीपा-पोती, मुम्बई में 50,000 मुस्लिम दंगाइयों द्वारा अमर जवान ज्योति या कहें कि राष्ट्र के अपमान पर कांग्रेस राज्य सरकार और केन्द्र की सोनिया सरकार की चुप्पी तथा दिल्ली के सुभाष पार्क में अचानक उग आयी अकबराबादी मस्जिद के निर्माण को न्यायालय द्वारा गिराने के आदेश पर भी सरकारी निष्क्रियता, क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि गत अप्रैल में भारत के तथाकथित सेकुलरवादियों ने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में गोमांस भक्षण उत्सव मनाया तथा उसकी पुनरावृत्ति का प्रयास दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में किया गया? मांग की गई थी कि छात्रावासों में गोमांस भक्षण की सुविधा होनी चाहिए। पर सरकार न केवल उदासीन बनी रही बल्कि जिन्होंने इसका विरोध किया, उनके ही विरुद्ध डंडा चलाया गया। इस विश्लेषण के बाद गंभीर प्रश्न यह है कि कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टीकरण अथवा वोट बैंक को खुश करने की इस नीति से मुस्लिम समाज का अरबीकरण हो रहा है या भारतीयकरण? क्या इससे वे भारत की मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं या अलगावादी मांगों के पोषण से राष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन रहे हैं? क्या चुनावी वोट बैंक की राजनीति, राष्ट्रहित से भी ऊपर है? देश के युवा विशेषकर पढ़े-लिखे युवकों को इस पर गंभीरत से विचार करना होगा, ताकि समाज की उन्नति के साथ राष्ट्र निर्माण में उनका सक्रिय सहयोग हो सके।

रविवार, 9 नवंबर 2014

हम्मीर देव चौहान ने झुका दिया था जलालुद्दीन का मस्तक



                           हम्मीर देव चौहान ने झुका दिया था जलालुद्दीन का मस्तक


कायर कौन होता है
यह दोषारोपण सामान्यत: हिंदुओं पर किया जाता है कि वे विगत 1200-1300 वर्षों के इतिहासकाल में कायर रहे हैं। हमने भी यहां कायर के विषय में ही प्रश्न कर दिया है कि ये होता कौन है?
अब इस प्रश्न के उत्तर पर विचार करें। सहज रूप से देखें -अपने चारों ओर के परिवेश को और उन परिस्थितियों को जिनमें हम डाकू को या किसी क्रूर व्यक्ति को या किसी आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को वीर के रूप में प्रसिद्घि पाते देखते हैं, ख्याति प्राप्त करते देखते हैं। संसार के लोग सामान्यत: ऐसे व्यक्ति को साहसी मानते हैं, और ऐसे व्यक्ति का साहसी के रूप में ही महिमामंडन भी करते हैं, पर वैसे उससे और उसके नाम तक से डरते हैं। डरने का या आतंकित करने वाला उसका आवरण ही उसके विषय में यह भ्रांत धारण बनाते हैं कि वह व्यक्ति साहसी है या वीर है।
हमारी मान्यता इस धारणा के सर्वथा विपरीत है। हमारी मान्यता है किसाहसी या वीर व्यक्ति वह होता है जिससे दूसरे लोगों के भय का हरण होता है। इसका अभिप्राय है कि दूसरे के प्राणों को लेने वाला साहसी या वीर नही होता, अपितु दूसरों के प्राणों की दुष्टों से रक्षा कराने में समर्थ व्यक्ति साहसी या वीर होता है। हमारा मानना है कि क्रूर व्यक्ति कायर होता है, क्योंकि वह जितने लोगों के प्राण लेता है, उनका ‘पापबोध’ उसे भीतर से पलायनवादी और कायर बनाता है। इसलिए वह अपराध करके भागता है, अपने चारों ओर सुरक्षा का घेरा बढ़ाता है, और अपने निकटस्थ लोगों से भी सदा आशंकित रहता है, आतंकित रहता है। आशंकित और आतंकित रहने के इस भ्रम में वह अपराध पर अपराध करता जाता है।
मुस्लिम आक्रांताओं का सच यही है
बस यही बात मुस्लिम आक्रांताओं पर लागू होती है। इन लोगों ने अपनी धार्मिक मान्यताओं के वशीभूत होकर तो भारत में नरसंहार किये ही कई बार तो अपनी क्रूरता का प्रदर्शन केवल इसलिए किया कि उन्हें इससे पहले एक बार या निरंतर कई बार व्यापक हिंदू प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था। इसलिए समय मिलते ही शत्रु का व्यापक संहार कर उसे  पूर्णत: समाप्त कर देना ही उन्होंने उचित समझा। यह सोच भयभीत, आशंकित और आतंकित मानसिकता को प्रकट करने वाली है। इसलिए जहां क्रूरता है वहां कायरता है। इसे आप यूं भी कह सकते हैं कि क्रूरता का दूसरा नाम ही कायरता है।
हिन्दुओं में क्रूरता कभी नही रही
हिन्दुओं में क्रूरता कभी नही रही। इनके यहां शौर्य होता है, वीरता होती है। इसलिए शत्रु को मारकर भागने की भारत में परंपरा नही रही। वीर पुरूष ना तो रण छोड़कर भागता है और ना ही शत्रु को मारकर भागता है। क्योंकि वह जो भी कार्य करता है, पूर्ण विवेक  के साथ करता है। इसलिए केवल भारत की ही ये परंपरा है कि यहां वीरता के साथ आशंकित या आतंकित होने के भाव व्यक्ति का पीछा नही करते, अपितु यहां वीरता को विवेक अपना संबल प्रदान करता है, और वीर विवेकपूर्ण ढंग से वसुंधरा का उपभोग करते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि वीर भोग्या वसुंधरा:।
रोग प्रतिरोधक क्षमता का होना जीवन होने का प्रमाण है
शरीर में यदि रोग प्रतिरोधक क्षमता है तो वह जीवित कहा जाता है, और यदि ‘रोग प्रतिरोधक’ क्षमता समाप्त होते-होते शून्य हो जाए तो शरीर को चिकित्सक लोग मृत घोषित कर देते हैं।
हिंदू के पास क्या था? यदि इस प्रश्न पर विचार किया जाए तो स्पष्ट होता है कि हिन्दू के पास उस काल में केवल सुदृढ़ रोग प्रतिरोधक क्षमता थी, वीरता थी, शौर्य था, और साहस था।
इतनी सारी वस्तुओं के होते हुए भी इस जाति का महिमामंडन करने वाला इतिहास लुप्त कर दिया जाना मानवता के इतिहास की सबसे अधिक लज्जास्पद और मर्मान्तक घटना है।
औरंगजेब की वसीयत
औरंगजेब ने अपनी वसीयत लिखी थी, जिसमें उसने हिंदुओं को और उनकी वीरता को लेकर कहा था-”तूरानी जो हमारे पूर्वजों के देश से आए हैं, हमारे बिरादर हैं….उन्हें जब युद्घ में पीछे हटने का आदेश दिया जाता है, तो इसमें वह लज्जा का अनुभव नही करते। वह इन महामूर्ख हिंदुओं से सैकड़ों गुना श्रेष्ठ हैं, जो सिर कटाना स्वीकार करते हैं, पर पीछे नही हटते।”
सुबुद्घ पाठक वृन्द! हिंदू इसी मिट्टी से बना था जिसे औरंगजेब ने ‘महामूर्ख’ कहकर महिमामंडित किया है। जबकि मुस्लिम किस मिट्टी से बना था, इसका उल्लेख इस प्रकार है-”जब तुमने किसी किले को घेर रखा हो, और उसके लोग अल्लाह और उसके पैगंबर के नाम पर तुमसे रक्षा की अपील करें तो उनको अल्लाह और उसके पैगंबर की ओर से सुरक्षा की गारंटी मत दो, अपितु अपनी और अपने साथियों की ओर से ही सुरक्षा की गारंटी दो, क्योंकि अल्लाह और उसके पैगंबर के नाम पर दी गयी गारंटी को भंग करने से अपनी ओर से दी गयी गारंटी को भंग करने में बहुत कम पाप है।”
‘सही मुस्लिम’- पृष्ठ 4294
अब तनिक औरंगजेब की वसीयत की उस पंक्ति पर विचार करें, जिसमें उसने हिन्दुओं को ‘महामूर्ख’ कहकर महिमामंडित किया है। इस ‘महामूर्ख’ शब्द को हमीर देव चौहान के साथ स्थापित करके देखें तो ज्ञात होगा कि हम्मीर देव चौहान औरंगजेब की दृष्टि में चाहे महामूर्ख हो परंतु हिंदू समाज में तो ‘हमीर हठ’ आज तक सम्मानित है।
हम्मीर देव चौहान
हम्मीर की हठ को समझना हिंदुओं की वीरता को समझने के लिए अति आवश्यक है। हमने ऐसे प्रसंग और कहानियां तो बहुत सुनी हैं कि अमुक मुस्लिम आक्रांता ने भारत पर प्रतिवर्ष आक्रमण करने की प्रतिज्ञा ली और अमुक समय पर भारत के अमुक क्षेत्र में अमुक राजा पर इस प्रकार के अत्याचार किये, परंतु कभी उक्त विदेशी आक्रांता का हर स्थिति में प्रतिरोध करने की प्रतिज्ञा लेने वाले आर्य हिंदू वीरों का स्मरण नही किया। पिछले पृष्ठों में हमने राजस्थान के रणथम्भौर और वहां के शासकों की वीरता का उल्लेख किया है।
किले बन गये थे राष्ट्र मंदिर
भारत के लोगों ने पत्थरों की पूजा करके बहुत कुछ हानि उठाई है, परंतु यह भी सत्य है कि कई लोगों ने पत्थरों से सीखा भी बहुत कुछ है। मध्यकाल में जब हमारा यौवन देश के काम आना ही अनिवार्य कर दिया गया था, तो उस समय यह देश राष्ट्रदेव की आराधना में लग गया था। सारे देवों को इसने भुला दिया और मानो सारे देवों को उठाकर अपने-अपने क्षेत्रों में बने पत्थरों के राष्ट्रमंदिरों अर्थात दुर्गों में लाकर स्थान दे दिया था। बहुत से किले उस समय पत्थरों के भवन मात्र न रहकर हमारे गर्व और गौरव का जीवंत प्रमाण बनकर रह गये थे। जिस किले ने जितना अधिक पौरूष दिखाया, शौर्य का प्रदर्शन किया या वीरता की अनुपम कहानी लिखी वह उतना ही हमारे लिए आज तक सम्माननीय है। झांसी का किला, दिल्ली का लालकिला, आगरा का लालकिला, चित्तौडग़ढ़ का किला, रणथम्भौर का किला इत्यादि हमारे मध्यकालीन राष्ट्र मंदिर हैं। इनके विजय, वैभव और वीरता के इतिहास को नमन करने और उसे अपनी भावपूर्ण विनम्र श्रद्घांजलि अर्पित करने के लिए जब कोई दर्शक यहां पहुंचता है तो उसके हृदय में स्वयं ही एक सुखद अनुभूति होती है। बांहें फड़कने लगती हैं, और हृदय में स्वयं ही हम सबका सामूहिक देव अर्थात राष्ट्रदेव अपना विशाल और विराट स्वरूप दिखाने लगता है। कहने लगता है-”वत्स! मैं वर्षों से यहां तुम्हारी कारागार में बंदी हूं। मुझे मुक्त कराओ और अपने अतीत के वैभव का गौरवपूर्ण इतिहास लिखो। मैं काल हूं और मैंने इस राष्ट्र के लिए समर्पित रहने वाले अनेकों वीरों के जीवन को राष्ट्रवेदी पर बलि होते देखा है, पर दुख के साथ कहना पड़ता है कि उन बलियों का सम्मान करना हमने नही सीखा।”
पत्थरों की भी अपनी भाषा होती है और वह उस भाषा में हमसे अपना सीधा संवाद स्थापित करते हैं। वह हमसे पूछते हैं कि मध्यकाल के जिन मंदिरों में स्थापित राष्ट्रदेव की मूर्ति के लिए तुम्हारे पूर्वजों ने जीवन भर  संघर्ष किया उन स्थानों की इतनी घोर उपेक्षा क्यों की जा रही है? तब ज्ञात होता है कि ये किले मात्र कुछ पत्थरों का सुव्यवस्थित और सुसज्जित रूप में संवरा हुआ एक स्वरूप नही हैं, अपितु इसका एक एक कण हमारे पूर्वजों की वीरता का मुंह बोलता प्रमाण है। हमने पत्थरों में जीवन की खोज इसीलिए की है कि वे अतीत को हमारे समक्ष लाकर जीवन्त बनाकर प्रस्तुत करने की क्षमता और सामथ्र्य रखते हैं। इस सच से कोई व्यक्ति कितना भाग सकता है?
बात पुन: रणथम्भौर की
बात रणथम्भौर की करें, तो उसके लिए अब पुन: परिचय कराना तो उचित नही होगा कि इसे हिंदू वीर सम्राट पृथ्वीराज चौहान के महान वंशजों ने अपना रक्त देकर सींचा था। इसलिए मध्यकाल में यह किला भारत की वीर हिन्दू जनता के लिए वीरता का एक स्मारक या तीर्थ ही बन गया। यह स्मरण रखना चाहिए कि भारत शस्त्र और शास्त्र दोनों का उपासक राष्ट्र रहा है, इसलिए इसने अपने मंदिर भी दो प्रकार के बनाये एक थे शास्त्रों की बात करने वाले तो दूसरे थे शस्त्र की बात करने वाले। शस्त्र की बात करने वाले मंदिर ही हमारे दुर्ग थे। पृथ्वीराज चौहान के पूर्वजों की राजधानी अजयमेरू (जिसे आजकल अजमेर कहते हैं) रही थी। उस राजधानी का नाम अजयमेरू रखा गया-तो बात स्पष्ट थी कि वहां भी पत्थरों ने हमें शिक्षा दी कि सदैव अजेय रहना है। इसलिए पृथ्वीराज चौहान ने तो अजेय रहने की प्रतिज्ञा ली ही, उसके वंशजों ने भी उस प्रतिज्ञा को आगे बढ़ाया और रणथम्भौर में जाकर अपने अजेय रहने का प्रमाण दिया। हमें पत्थरों ने शिक्षा दी और हमने इतिहास बनाया।
तेजसिंह तरूण अपनी पुस्तक ”राजस्थान के सूरमा” के पृष्ठ 18 पर लिखते हैं-”पृथ्वीराज के पुत्र गोविन्दराज ने तराईन के युद्घ अर्थात 1192 ई. के पश्चात 1194 ई. में रणथम्भौर के पर्वतीय अंचल में अपना एक पृथक राज्य स्थापित कर लिया और आगे के शासक राज्य को सुसंगठित करने में लगे रहे। गोविन्दराज और हमीर के बीच के समय में रणथम्भौर की कीर्ति पताका दूर दूर तक फहराती रही।…हमीर द्वारा भीमरसपुर, मदालकीर्ति दुर्ग, घाना नगर, उज्जैन (मालवा) आदि कई प्रमुख स्थानों पर अधिकार कर लेने के उपरांत रणथम्भौर दिल्ली के सुल्तानों को और भी अधिक खटकने लगा। कारण भी स्पष्ट था, हमीर ने न केवल उज्जैन पर विजय प्राप्त की, वरन क्षिप्रा के तट पर बने महाकालेश्वर मंदिर का, जिसे इल्तुतमिश ने धूल धूसरित कर दिया था, जीर्णोद्घार करवाकर अपने इष्ट देव शंकर भगवान (महाकाल) की पूजा अर्चना जो की थी, यह भला दिल्ली के मुस्लिम शासकों को स्वीकार कैसे हो सकता था (अर्थात हमारे हिन्दू शासक का यह वीरता पूर्ण कृत्य कि वह किसी धूल धूसरित हुए मंदिर का जीर्णोद्घार कराये और फिर वहां अपने इष्ट देव की पूजा करें) इससे उनका भयभीत होना स्वाभाविक था।”
विद्वान लेखक के शब्द ‘भयभीत’ पर विचार करने की आवश्यकता है। इसी शब्द ने मुस्लिमों को सदा आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया, वह किसी उठते हुए और अपने राष्ट्र धर्म के प्रति पूर्णत: सजग और सावधान हिंदू शासक के प्रति सदा ही आशंकित और आतंकित रहते थे, इसलिए वह भयभीत हो उसे क्रूरता से मिटा देना ही अपना सर्वोपरि धर्म समझते थे।
हिंदू वीर हमीर देव की वीरता
हिंदू वीर हमीर देव के स्वाभिमान और वीरता को नष्ट करने के लिए अलालुद्दीन खिलजी  ने 1209ई. में रणथम्भौर पर आक्रमण कर दिया। जलालुद्दीन खिलजी वंश का संस्थापक कहा जाता है। जिस गुलाम वंश की गरम राख पर इसने भारत में खिलजी वंश की स्थापना की थी  वह तो अब अतीत के गर्त में चला गया था, पर यह सत्य है किभारत के लिए इस वंश के शासकों के सपने भी वही रहे जो इसके पूर्ववर्ती के थे। ना आदर्शों में कोई परिवर्तन आया और ना ही उद्देश्यों में कोई परिवर्तन आया। अत: कहना पड़ेगा कि भारत के लिए वंश परिवर्तन सत्ता परिवर्तन न होकर मात्र ‘नई बोतल में पुरानी शराब’ ही थी। जिसे सही अर्थों में परिवर्तन नही कहा जा सकता।
रणथम्भौर और उसके वीर शासक हम्मीर देव चौहान ने अपनी परंपरागत वीर शैली में दिल्ली के नये सुल्तान जलालुद्दीन की सेना का सामना किया, जलालुद्दीन भी जानता था कि उसका सामना किस हिन्दू वीर से होने जा रहा है? उसे भली प्रकार ज्ञात था कि अब से पूर्व में राजस्थान के इस पवित्र वीर मंदिर (रणथम्भौर के दुर्ग) ने क्या क्या गुल खिलाए हैं? इसने अभी तक मस्तक झुकाया नही है, अपितु आक्रांता का मस्तक झुकवाया है। अत: ऐसे वीर मंदिर की ओर बढऩा ‘भारी भूल’ भी हो सकती है।
जलालुद्दीन की सेना भारत के मस्तक बने रणथम्भौर दुर्ग की ओर बढ़ती जा रही थी। देश की हवाओं की सनसनाहट ने हिंदू वीर हम्मीर देव चौहान को उसके वीर पूर्वजों की गौरव गाथा जाकर बतानी आरंभ कर दी। जिससे वीर हम्मीर देव चौहान के शरीर में झनझनाहट हो उठी, वह शेर की भांति उठ खड़ा हुआ, और शत्रु की प्रतीक्षा करने लगा।
हवा ने अपना काम कर दिया था तो सूर्य देव भी पीछे नही थे, हमारे क्षत्रिय राजवंशों में सूर्यवंश की गरिमा से भला कौन परिचित नही है? सूर्य सम तेजस्विता को धारण कर ‘शत्रु हन्ता’ बनने की परंपरा भारत में युगों पुरानी है। इसलिए सूर्य ने अपने पुत्र हम्मीर देव की तेजस्विता को सावधान किया कि आपत्ति आने वाली है। अत: अपने क्षात्रधर्म और राष्ट्रधर्म के लिए सावधान हो जाओ। राजा ने सूर्य के आवाहन को समझा और रणथम्भौर के ध्वजदण्ड को स्मरण कर उसे नमन किया। हम्मीर के सामने आज मानो पृथ्वीराज चौहान भी साक्षात आ खड़े हुए थे, जो कहे जा रहे थे-”वत्स! मैंने जिस स्वाधीनता के लिए अपना बलिदान दिया था, आज उसी स्वाधीनता की रक्षा करना तुम्हारा पवित्र कत्र्तव्य है। ना तो पताका झुकनी चाहिए और ना ही मस्तक झुकना चाहिए। सावधान होकर संघर्ष करो, और मां भारती के ऋण से उऋण होने के लिए रण के लिए प्रस्थान करो।”
हम्मीर देव ने अपने सैन्याधिकारियों और सरदारों से युद्घ विषयक चर्चा की और आसन्न संकट से देश के उन  रक्षकों को अवगत कराया। सभी ने एकमत से आततायी के आक्रमण का सामना करने का प्रस्ताव पारित किया। सेना को सतर्क किया गया। युद्घ के लिए आपात ध्वनि विस्तारकों की नाद से आकाश गूंज उठा। राजधानी की प्रजा भी सतर्क और सावधान हो गयी कि राष्ट्रधर्म के निर्वाह का एक और अवसर उपलब्ध हो गया है।
उधर जलालुद्दीन अपने आतंक का खेल खेलता रणथम्भौर की ओर बढ़ा चला आ रहा था और इधर रणथम्भौर का कण-कण राष्ट्रवाद की भावना से मचल रहा था। शेरों ने व्रत रखना आरंभ कर दिया था कि अब तो भोजन भी रण में किया जाएगा और भोजन भी शिकार के ताजे रक्त का। चारों ओर वीरोचित परिवेश था, कहीं से भी कायरता की या पलायनवाद की संभावना तक दृष्टिगत नही हो रही थी।
वैसे भी यह वो काल था जब हिंदू समाज में कायरता और रण के प्रति पलायनवाद को देश द्रोह, धर्मद्रोह और जातिद्रोह माना जाता था और ऐसे देशद्रोही को, धर्मद्रोही को या जातिद्रोही को लोग समाज से बहिष्कृत कर दिया करते थे। यही कारण है कि जिस व्यक्ति ने धर्मांतरण कर मुस्लिम मत स्वीकार किया, या उनसे विवाहादि का प्रस्ताव स्वीकार कर ऐसे संबंध बनाकर उन्हें अपनी लड़कियां दीं उनसे लोग घृणा करते थे। हम आज तक भी इस घृणा को अपने समाज में यथावत देखते हैं। यह घृणा एक इतिहास की ओर और एक संस्कार की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करती है, जो सदियों पुराना संस्कार है, वह कभी हमारे वीरों के सिर चढ़कर बोलता था। इस संस्कार को तनिक सहेजकर रखने की आवश्यकता है।
जलालुद्दीन अपनी पूर्ण तैयारी के साथ रणथम्भौर में आ डटा। उधर रणथम्भौर के शेर पहले से ही अपने शिकार की प्रतीक्षा में थे। उन्हें अपने स्वामी के एक संकेत मात्र की प्रतीक्षा थी। वह मिले और हमारे भूखे शेर अपने शिकार पर झपटे। अंत में राजा हम्मीर देव चौहान ने अपनी सेना को संकेत दिया और युद्घ प्रारंभ हो गया। जलालुद्दीन ने उस हिंदू वीरता का आज पहली बार सामना किया था, जिसे उसने अब से पूर्व कभी नही देखा था। भयंकर रक्तपात हुआ, अनेकों हिंदू वीरों ने अपना बलिदान दिया पर रण नही छोड़ा। अंत में शत्रु सेना को ही रण से भागना पड़ा। जलालुद्दीन खिलजी परास्त और लज्जित होकर दिल्ली लौट आया और फिर कभी रणथम्भौर की ओर पैर करके भी नही सोया। रणथम्भौर के किले पर लहराती हिन्दू पताका को हम्मीर देव चौहान ने अपने पूर्वजों को नमन किया और उन्हें विनम्र श्रद्घांजलि देकर अपनी जीत को उन्हीं का आशीर्वाद मानकर उनके श्री चरणों में सादर समर्पित कर दिया। जलालुद्दीन को यह हम्मीर सपनों में भी डराता रहा और वह इस वीर से सपनों में भी कहता रहा कि-”अब उधर नही आऊंगा…नही आऊंगा….नही आऊंगा।”
ये थे हमारे वीर जिनके कारण हम आज तक जीवित हैं। उनके मंदिरों (दुर्गों) में आज कोई पुजारी नही है, चारों ओर धूल कण हैं, स्मारकों पर झाड़ खड़े हैं। नई पीढ़ी का दायित्व है कि इन हिंदूवीरों के मंदिरों की वह स्वयं को पुजारी सिद्घ करे, और इनकी दिवंगत आत्माओं को पूर्णत: आश्वस्त करे कि हम आज भी रणथम्भौर की यश गाथा को दुबारा दोहराने के लिए कृत संकल्प है, और तब तक रहेंगे जब तक इस देश को हिंदू राष्ट्र मानने समझने और स्थापित करने की भावना हमारे भीतर जीवित है।
इसी हम्मीर देव चौहान ने अलाउद्दीन खिलजी के सामने समर्पण कर देने के उसके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था और युद्घ क्षेत्र में ही सामना करने की हठ पर बैठ गया। इसीलिए कवि को ‘हम्मीर हठ’ लिखने का अवसर मिल गया था।

                                  

मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

मुसलमान नकली नुत्फे की पैदायश ?

मुसलमान नकली नुत्फे की पैदायश ?

शिक्षा के महत्त्व से कोई भी व्यक्ति इंकार नहीं करता . क्योंकि शिक्षा से मनुष्य विनयशील ,और सभ्य बनता है . ऐसा भी माना जाता है कि जैसे जैसे कोई बालक या व्यक्ति जितनी अधिक शिक्षा प्राप्त करता जाता है ,वैसे ही उसके विचार और चरित्र में बुराइयां दूर होती जाती हैं .और ऐसे व्यक्ति किसी एक देश या जाति के लिए नहीं सम्पूर्ण विश्व की भलाई के लिए ही काम करते है ,
लेकिन यह नियम मूसलामानों पर लागु नहीं होता , क्योंकि ऐसे करोड़ों उदहारण है , कि मुसलमान जितने भी अधिक शिक्षित होते जाते हैं , उतने ही अधिक , उग्र , हिंसक ,अपराधी और आतंकवादी बनाते जाते हैं .इनकी मिसाल उस कार या स्कूटर की तरह है , जिसे जितना भी सुधरवाया जाता है , उतने ही ख़राब हो जाते हैं .और जब जाँच कराई जाती है , तो मैकेनिक कहता है " इनमे तो निर्माण सम्बन्धी दोष है (production defect"और इस कार या स्कूटर को सुधारना असंभव है .इसे तो कबाड़खाने में फेक देना चाहिए .क्योंकि इस कार या स्कूटर को बनाने के लिए जो भी पुर्जे लगाये गए हैं ,वह स्तर हीन ( below standard ) हैं . यही कारण है कि अफजल गुरु , और डेविड हेडली राणा जैसे सभी शिक्षित मसलमान कट्टर आतंकवादी पाए जाते है .क्योंकि इनकी पैदायश में ही खोट ( defect in manufacture ) है ,इस लेख में इसी रहस्य से पर्दा उठाया जा रहा है .और सभी तथ्य कुरान और हदीस से प्रमाणित हैं ,
1-मुसलमानों की फितरत समान है
फितरत अरबी शब्द है ,जिसे "फितरह  فطرة " भी बोला जाता है .हिंदी में इसके अर्थ स्वभाव ' प्रकृति ' या' वृत्ति ' होते हैं .और अंगरेजी में फितरत के अर्थ ‘disposition’nature’instinct’होते हैं .सभी मुसलमानों की फितरत बिलकुल एक जैसी होती है , यह इन हदीसों से साबित होता है ,
"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने हमें बताया है ,कि जैसे ही मुसलमानों का बच्चा पैदा होता है .अल्लाह उसकी फितरत बना देता है . जो मरते समय तक वैसी ही बनी रहती है .और जिस से यहूदियों , ईसाइयों और मुसलमानों के बीच का फर्क पता चल जाता है "

حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ مَا مِنْ مَوْلُودٍ إِلاَّ يُلِدَ عَلَى الْفِطْرَةِ فَأَبَوَاهُ يُهَوِّدَانِهِ وَيُنَصِّرَانِهِ وَيُشَرِّكَانِهِ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَأَيْتَ لَوْ مَاتَ قَبْلَ ذَلِكَ قَالَ ‏"‏ اللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا كَانُوا عَامِلِينَ ‏"‏ ‏.‏

Sahih Muslim, Book 033, Number 6426

"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है बिना फितरत के कोई मुस्लिम बच्चा पैदा नहीं होता , चाहे उसके अभिभावक उसे यहूदी , मजूसी , या ईसाई बनाने का प्रयत्न करें .जैसे तुम किसी जानवर के अंग काट दो उसकी फितरत वही रहेगी "
Sahih al-Bukhari, Volume 2, Book 23, Number 441

2-सभी मुसलमान नुत्फे से बने

दुसरे लोगों की तरह मुसलमान भी वीर्य यानि नुत्फे से पैदा हुए हैं , यह कुरान की इस आयत से प्रमाणित है ,

" निश्चय ही हमने मनुष्य को गीली मिट्टी के सत से बनाया ,फिर उसे सुरक्षित करके एक जगह टपकती हुई बूंद नुत्फे के रूप में रख लिया ,फिर उस नुत्फे को लोथड़े का रूप दे दिया .फिर उस लोथड़े को बोटी का रूप दे दिया .फिर् बोटियों से हड्डियां बनायी .फिर उन हड्डियों पर मांस चढ़ा दिया .फिर उसका बिलकुल दूसरा ही रूप देकर खडा कर दिया .तो देखो बरकत वाला अल्लाह ही सबसे उत्तम सृष्टिकर्ता है ." सूरा -अल मोमनीन 23:12 से 15 तक
(इस आयत से साफ पता चलता है कि दुसरे प्राणियों की तरह मुसलमानों का जन्म सबसे पहले वीर्य या नुत्फे से होता है .जो माँ के गर्भाशय में पल बढ़ कर बच्चे के रूप में जन्म लेता है .अर्थात बच्चे के जन्म का महत्त्वपूर्ण और मुख्य आधार " नुत्फा Sperm" ही है )
3-कुरान में वीर्य के नाम

सम्पूर्ण कुरान में वीर्य को 16 बार तीन विभिन्न नामों से उल्लेख किया गया है ,लेकिन कहीं भी वीर्य के "शुक्राणु Sperm" के बारे में कुछ नहीं लिखा है .इस से स्पष्ट होता है कि अल्लाह और उसके रसूल को वीर्य के बारे में तो ज्ञान था ,लेकिन वीर्य में होने वाले " शुक्राणुओं " के बारे में कोई ज्ञान नहीं था .कुरान में वीर्य के तीन नाम इस प्रकार हैं ,
1. -Nutfah" نطفة "कुरान में यह शब्द 12 बार आया है .और इस शब्द का प्रयोग करते हुए कुरान और हदीस में बताया है कि नुत्फे से ही मनुष्य पैदा होता है .नुत्फा शब्द कुरान की जिन सूरा और आयतों मौजूद है ,उनकी सूरा और आयत नंबर इस प्रकार हैं .nutfah: 16:4, 18:37, 22:5, 23:13, 23:14, 35:11, 36:77, 40:67, 53:46, 75:37, 76:2, 80:19.नुत्फा का अर्थ अरबी शब्द कोष में इस प्रकार बताया है , एक द्रव (liquid ) मना जाता है कि इसी से मनुष्य पैदा होता है

2.माअ-Maa" ماء  "कुरान में यह शब्द तीन बार आया है . वैसे इसका अर्थ पानी (water ) होता है . लेकिन कुरान में इसका अभिप्राय पुरुष और स्त्री के वीर्य से लिया गया है .(Water. Sometimes used for semen (male or female). यह शब्द कुरान में इस जगह आया है .(Used in this way in verses 32:8 and 77:20, and 86:6).
3.मनी- Maniyy" مني "यह शब्द कुरान में केवल एक ही बार आया है .और पुरुष या स्त्री के वीर्य (Male or female semen )के लिए प्रयुक्त किया गया है .सभी हदीसों में यह शब्द आयशा द्वारा मुहम्मद के  कपड़ों से वीर्य के धब्बे साफ़ करने के प्रसंग में आया है .( It is frequently used in hadith ,that Aisha used to clean semen off Muhammad’s clothes)यह शब्द कुरान की सूरा अल कियामा 75 की आयत 37 में आया है .
4-वीर्य के चालीस चरण
हदीसों के अनुसार वीर्य की बूंद को बच्चे के रूप में जन्म देने तक चालीस चरण (stages ) पूरा करने पड़ते हैं ,जो इन हदीसों में बताया है ,
"अबू तुफैल ने कहा कि एक बार मैं रसूल के घर गया , वहां अबू शरिया हुजैफा बिन उसैद अल गिफारी भी मौजूद थे। ,और सबके सामने रसूल ने बताया कि जब "नुत्फा " (वीर्य semen ) के माता के गर्भाशय में चालीस चरण ( 40 stages ) पूरे हो जाते हैं , यानि नुत्फा चालीस दिन रात गर्भाशय में पड़ा रहता है , तो एक फ़रिश्ता अन्दर घुस कर नुत्फा को ठीक आकार दे देता है ,और फ़रिश्ता वहीं पर तय कर देता है कि नुत्फा से लड़का बनाया जाए , या लड़की (male or female )"
सही मुस्लिम -किताब 33 हदीस 6394

यही बात कुछ अंतर से दूसरी हदीस में भी बतायी गयी है ,
सही मुस्लिम-किताब 33 हदीस 6395

5-बच्चों में पैतृक समरूपता
इस बात को विज्ञान भी स्वीकार करता है कि संतान पैदा करने में वीर्य यानि ' नुत्फा " का होना जरुरी है ,और उस वीर्य से लड़का होगा ,या लड़की यह ठीक से बताना मुश्किल होता है और होने वाली संतान पिता या माता में किसके समरूप होगी यह इन हदीसों में बताया गया है .जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है .
1.बाप बेटे में समरूपता
"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है ,यदि पुरुष किसी स्त्री से सम्भोग करते समय स्त्री से पहले स्खलित होता है तो ,उसका होने वाला बच्चा पिता के अनुरूप होगा . और यदि स्त्री पहले स्खलित होती है , तो बच्चा माता के अनुरूप होता है " सही बुखारी -जिल्द 4 किताब 55 हदीस 546

2.माँ बेटी में समरूपता
"उम्मे सलमाँ ने रसूल से पूछा यदि किसी औरत रात "एहतलामاحتلام-   "यानी स्वप्नदोष(  nocturnal discharge  ) हो जाए , तो क्या उसके लिए गुस्ल (bath ) करना अनिवार्य है , रसूल ने कहा हाँ .यदि किसी औरत रात के समय ( wet-dream ) "एहतलाम احتلام  "हो जाये और उसे पता चले कि उसकी योनि से " माअ Maa" ماء  "( "( वीर्य ) निकल गया ,और वह गुस्ल नहीं करे तो होने वाला बच्चा माता के अनुरूप होगा
.सही बुखारी -जिल्द 4 किताब 55 हदीस 545
हो सकता है कि जिन लोगों को शरीर विज्ञानं या भ्रूण विज्ञानं का पता नहीं है ,या कुरान और अल्लाह की ऐसी बातों पर विश्वास कर लेंगे .लेकिन शरीर में वीर्य कहाँ बनता है ,इसके बारे में कुरान में जो भी बताया है ,उसे पढ़कर अल्लाह और उसके रसूल की मुर्खता पर मुसलमान अपना सिर पीटने लगेंगे ,क्योंकि कुरान में कहा है ,
6--वीर्य कहाँ बनता है
एक साधारण दसवीं कक्षा का विद्यार्थी भी जानता है कि वीर्य और शुक्राणु पुरुष के अंडकोष में तैयार होते हैं , लेकिन कुरान इसे रीढ़ और हंसली की हड्डी में बता रही है , जो इन आयतों दिया है ,
" तो मनुष्य देखे कि वह किस चीज से बना है ,एक उछलते हुए पानी (gushing fluid) से बना है ,जो निकलती है रीढ़ और हंसली के बीच में से (issued from between  loins and ribs)
"يَخْرُجُ مِنْ بَيْنِ الصُّلْبِ وَالتَّرَائِبِ "
issuing from between the loins [of man] and the pelvic arch [of woman]. (86:7)
सूरा -अत तारिक 86:5 से 7 तक
पूरी जानकारी के लिए देखिये ,विडिओ
Quran 86:5-7 Sperm comes from backbone of man & ribs of woman

http://www.youtube.com/watch?v=DtDp7mTnleA

7-वीर्य के बारे में सच्चाई
विकीपीडया में वीर्य के बारे में इस प्रकार लिखा है ,"वीर्य एक जैविक तरल पदार्थ है, जिसे बीजीय या वीर्य तरल भी कहते हैं, जिसमे सामान्यतः शुक्राणु होते हैं. यह जननग्रन्थि (यौन ग्रंथियां) तथा नर अंगों द्वारा स्रावित होता है और मादा अंडाणु को निषेचित कर सकता है.
(Semen, also known as seminal fluid, is an organic fluid that may contain spermatozoa. It is secreted by the gonads (sexual glands) and  sexual organs of male , and can fertilize female ova.

8-निष्कर्ष
इन सभी तथ्यों से यह बातें सिद्ध होती हैं कि ,
1.सभी मुसलमानों का स्वभाव एक जैसा होता है , जिसको सुधारना असंभव है .
2.मुहम्मद को झूठ बोलने और लोगों को अंधविश्वासी बनाने की आदत थी .
3.अल्लाह सर्वज्ञ नहीं , बल्कि महा मूर्ख है , उसे इतना भी ज्ञान नहीं कि वीर्य रीढ़ या हंसली में नहीं बल्कि पुरुष के अण्डकोश ( testicles ) में पैदा होता है .
4.अंतिम और महत्त्वपूर्ण बात यह सिद्ध होती है कि मुसलमान जिस वीर्य से बनते हैं वह नकली है .और बनावटी है .क्योंकि वह गैर मुस्लिमों की तरह अंडकोष से नहीं किसी दूसरी जगह से बनाया जाता है .अर्थात defctive और duplicate है .
यही कारण है कि सभी मुसलमान अपराधी और आतंकवादी होते हैं .इनको सुधारने की जगह नष्ट कर देना ही उचित होगा .

इस्लामी अन्ध्विज्ञान

इस्लामी अंधविज्ञान !

विज्ञानं और इस्लाम एक दूसरे के विरोधी हैं , क्योंकि विज्ञानं तथ्यों को तर्क की कसौटी पर परखने के बाद और कई बार परीक्षण करने के बाद उनको स्वीकार करता है .जबकि इस्लाम निराधार , बेतुकी , और ऊलजलूल बातों पर आँख मूँद पर ईमान रखने पर जोर देता है . इतिहास गवाह है कि इस्लाम के उदय से लेकर मुसलमानों ने " हुक्के " के आलावा कोई अविष्कार नहीं किया ,लेकिन दूसरों के द्वारा किये गए अविष्कारों के फार्मूले चोरी करके उनका उपयोग दुनिया को बर्बाद करने के लिए जरुर किया है .
लगभग 15 वीं शताब्दी तक मुसलमान तलवार की जोर से इस्लाम फैलाते . लेकिन जैसे जैसे विज्ञानं की उन्नति होने लगी , तो लोगों की विज्ञानं के प्रति प्रति रूचि बढ़ने लगी , यह देख कर जाकिर नायक जैसे धूर्त इस्लाम के प्रचारकों ने नयी तरकीब निकाली ,यह लोग कुरान और हदीस में दी गयी बेसिर पर की बातों का तोड़ मरोड़ कर ऐसा अर्थ करने लगे जिस से यह साबित हो जाये कि कुरान और हदीसें विज्ञानं सम्मत हैं .मुसलमानों की इसी चालाकी भरी नीति को ही " इस्लामी अंधविज्ञानं " कहा जाता है .इसका उद्देश्य पढ़े लिखे लोगों को गुमराह करके उनका धर्म परिवर्तन कराना है .लेकिन जाकिर नायक जैसे लोग विज्ञानं की आड़ में लोगों के दिमाग में इस्लाम का कचरा भरने का कितना भी प्रयास करें ,खुद कुरान और हदीस ही उनके दावों का भंडाफोड़ कर देते है .यद्यपि कुरान और हदीस में हजारों ऐसे बातें मौजूद है ,जो विज्ञानं के बिलकुल विपरीत हैं , लेकिन कुछ थोड़े से उदहारण यहाँ दिए जा रहे हैं .

1-आकाश के सात तल
इस्लामी मान्यता के अनुसार आकाश के सात तल हैं , जो एक दुसरे के ऊपर टिके हुए हैं . और अल्लाह सबसे ऊपर वाले असमान पर अपना सिंहासन जमा कर बैठा रहता है . और वहीँ से अपने फरिश्तों या नबियों के द्वारा हुकूमत चला रहा है .इसी लिए आकाश को अरबी में " समावात " भी कहा जाता है , जो बहुवचन शब्द है . अंगरेजी में इसका अनुवाद Heavens इसी लिए किया जाता है , क्योंकि इस्लाम में आकाश के सात तल माने गए हैं .जैसा कि इन आयतों में कहा गया है .

"क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने किस प्रकार से सात आसमान ऊपर तले बनाये हैं "
सूरा -नूह 71:15
कुरान की इस बात की पुष्टि इस हदीस से भी होती है ,
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने अपनी पुत्री फातिमा से कहा करते थे कि जब भी अल्लाह को पुकारो तो , कहा करो कि ' हे सात असमानों के स्वामी अल्लाह "
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي، شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُبَيْدَةَ، حَدَّثَنَا أَبِي كِلاَهُمَا، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي، صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ أَتَتْ فَاطِمَةُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم تَسْأَلُهُ خَادِمًا فَقَالَ لَهَا ‏ "‏ قُولِي اللَّهُمَّ رَبَّ السَّمَوَاتِ السَّبْعِ ‏"‏ ‏.‏ بِمِثْلِ حَدِيثِ سُهَيْلٍ عَنْ أَبِيهِ ‏.‏
सही मुस्लिम -किताब 35 हदीस 6553

2-तारे पृथ्वी के निकट हैं
विज्ञानं ने सिद्ध कर दिया है कि तारे ( stars ) पृथ्वी से करोड़ों प्रकाश वर्ष मील दूर हैं .और दूरी के कारण छोटे दिखायी देते हैं .लेकिन कुरान इस से बिलकुल उलटी बात कहती है ,कि तारे आकाश के सबसे निचले आकाश में सजे हुए है .यानी पृथ्वी के बिलकुल पास हैं .कुरान की यह आयत देखिये ,
"हमने दुनिया के आकाश को सबसे निचले आकाश को तारों से सजा दिया है "
सूरा -अस साफ्फात 37:6

3-सूरज दलदल में डूब जाता है
कुरान की ऐसी कई कहानियां हैं ,जो यूनानी दन्तकथाओं से ली गयी हैं .ऐसी एक कहानी सिकंदर की है , जिसने दावा किया था कि उसने सूरज को एक कीचड़ वाले दलदल में डूबा हुआ देखा था .सिकंदर को कुरान में "जुल करनैन " ذو القرنين "कहा गया है . अरबी में इस शब्द का अर्थ "दो सींगों वाला two-horned one" होता है .इस्लामी किताबों में इसे भी अल्लाह का एक नबी बताया जाता है ,लेकिन जुल करनैन वास्तव में कौन था इसके बारे में इस्लामी विद्वानों में मतभेद है , मौलाना अबुल कलाम आजाद ने अपनी किताब ' असहाबे कहफ " में इसे सिकंदर महान Alexander the Great साबित किया है .कहा जाता है कि जब सिकंदर विश्वविजय के लिए फारस से आगे निकल गया तो उसने सूरज को एक दलदल में डूबते हुए देखा था .और कुरान इस बात को सही मानकर जोड़ लिया गया .कुरान में बताया गया है कि सूर्यास्त के बाद सूरज कहाँ डूब जाता है ,
" यहाँ तक कि वह ( जुल करनैन ) उस जगह पहुंच गया ,और उसने सूरज को एक कीचड़ वाले दलदल (muddy spring ) डूबा हुआ पाया "
सूरा -अल कहफ़ 18:86

4-रात में सूरज कहाँ रहता है ?
इस बात को सभी लोग जानते हैं कि सूरज अस्त होने के बाद भी प्रथ्वी के किसी न किसी भाग पर प्रकाश देता रहता है ,यानि प्रथ्वी के उस भाग पर दिन बना रहता है , लेकिन हदीस के अनुसार अस्त होने के बाद सूरज रात भर अल्लाह के सिंहासन के नीचे छुपा रहता है
"अबू जर ने कहा कि एक बार रसूल ने मुझ से पूछा कि क्या तुम जानते हो कि सूर्यास्त के बाद सूरज कहाँ छुप जाता है , तो मैंने कहा कि रसूल मुझ से अधिक जानते है . तब रसूल ने कहा सुनो जब सूरज अपना सफ़र पूरा कर लेता है ,तो अल्लाह को सिजदा करके उसके सिंहासन के कदमों के नीचे छुप जाता है .फिर जब अल्लाह उसे फिर से निकलने का हुक्म देते है , तो सूरज अल्लाह को सिजदा करके वापस अपने सफ़र पर निकल पड़ता है .और यदि अल्लाह सूरज को हुक्म देगा तो सूरज पूरब की जगह पश्चिम से निकल सकता है
.सही बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 421

5-अंधविश्वासी रसूल
सूर्यग्रहण एक प्राकृतिक घटना है .जिसका क़यामत से कोई सम्बन्ध नहीं है .लेकिन मुसलमान जिस मुहम्मद को अल्लाह का रसूल और हर विषय का जानकार बताते हैं , वह सूर्यग्रहण के समय डर के मारे कांपने लगता था ,यह बात इस हदीस से पता चलती है ,
"अबू मूसा ने कहा कि जिस दिन भी सूर्यग्रहण होता था , रसूल डर के मारे खड़े होकर कांपने लगते थे .उनको लगता था कि यह कियामत का दिन है , जिसमे कर्मों का हिसाब होने वाला है .फिर रसूल भाग कर मस्जिद में घुस जाते थे , वहां लम्बी लम्बी नमाजें पढ़ते थे और सिजदे करते थे .हमने उनको इतना भयभीत कभी नहीं देखा . शायद वह सूर्यग्रहण को कियामत की निशानी समझते थे . और अल्लाह से अपने गुनाहों को माफ़ करने के लिए इतनी अधिक इबादत किया करते थे ."
सही बुखारी - जिल्द 2 किताब 15 हदीस 167

क्या ऐसे अंधविश्वासी और डरपोक व्यक्ति की बातों पर ईमान लाना मूर्खता नहीं है ?

6-कपड़ा चोर चट्टान
मुसलमान जिन हदीसों को प्रमाणिक मानकर खुद मानते हैं ,और दूसरों को मानने पर जोर डालते हैं , उनमे ऐसी ऐसी बातें दी गयी हैं ,जिनपर कोई मूर्ख ही विश्वास कर सकता है .फिर भी मुस्लिम प्रचारक दावा करते रहते हैं कि कुरान की तरह हदीसें भी विज्ञानं सम्मत है .इसके लिए यह एक हदीस ही काफी है ,जिसे पढ़कर हदीस कहने वाले की बुद्धि पर हंसी आती है .जिसमे मूसा (Moses ) के बारे में एक घटना दी गयी है ,हदीस देखिये ,

"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है कि बनीइजराइल के लोग नंगे होकर नहाया करते थे ,और एक दूसरे के गुप्तांगों को देखा करते थे . लेकिन मूसा अकेले ही नहाते थे . क्योंकि उनके अंडकोष काफी बड़े थे . उनमे (scrotal hernia ) की बीमारी थी . और लोगों को यह बात पता नहीं थी . एक बार जब मूसा अपने कपडे एक चट्टान पर रख कर नहाने के लिए नदी में गए तो . चट्टान उनके कपडे लेकर भागने लगी . और मूसा नंगे ही उसके पीछे दौड़ते हुए कहने लगे " चट्टान मेरे कपडे वापस कर " इस तरह लोगों को पता चल गया कि मूसा के अंडकोष बड़े हैं . तब लोगों ने चट्टान से मूसा के कपडे वापस दिलवाए .और नाराज होकर मूसा ने उस चट्टान को काफी मारा .रसूल ने कहा " अल्लाह की कसम आज भी उस चट्टान पर मारने के छह सात निशान मौजूद हैं "
सही बुखारी - जिल्द 1किताब 5 हदीस 277

यही हदीस सही मुस्लिम में भी मौजूद है .
सही मुस्लिम -किताब 3 हदीस 669 और सही मुस्लिम -किताब 30 हदीस 5849

यही नहीं मूसा की इस कहानी के बारे में कुरान में भी लिखा है . और मुसलमानों को निर्देश दिया गया है कि " हे ईमान वालो तुम उन लोगों जैसे नहीं बन जाना , जिन्होंने मूसा को (नंगा देख कर ) दुःख पहुंचाया था " सूरा -अहजाब 33:69
कुरान और हदीसों के इन कुछ उदाहरणों को पढ़ कर लोग यही सोचेंगे कि जब मुसलमानों के अल्लाह और रसूल आकाश ,सूरज ,और चट्टान के बारे में ऐसे अवैज्ञानिक विचार रखते हैं ,तो मुसलमान कुरान और् हदीस विरोधी विज्ञानं क्यों पढ़ते हैं? इसका एक ही कारण है कि मुसलमान विज्ञानं से दुनियां की भलाई नहीं दुनिया को बर्बाद करना चाहते हैं ,या तो वह कहीं से किसी अविष्कार का फार्मूला चुरा लेते है .या फिर विज्ञानं का उपयोग विस्फोटक बनाने , नकली नोट छापने , फर्जी क्रेडिट कार्ड से रुपये निकालने ,और दूसरों की साईटों को हैक करने में करते हैं .
लेकिन विज्ञानं की सहायता से इतने कुकर्म करने के बाद भी ,मुसलमानों में इस्लामी अंधविज्ञानं हमेशा बना रहता है .और क़यामत तक बना रहेगा .